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तीन प्रदेशों को जोड़ने वाला सड़क मार्ग खंडवा के लिए ‘लाइफ लाइन’

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तीन प्रदेशों को जोड़ने वाला सड़क मार्ग खंडवा के लिए ‘लाइफ लाइन’

खंडवा। फोर-लेन सड़क निर्माण खंडवा जिले की लाइफ लाइन बनने जा रहा है।

बैतूल- खंडवा फोरलेन से एमपी का कनेक्टिविटी नक्शा ही बदल जाएगा।

इंदौर- नागपुर का सफर 6 घंटे में मैं ही पूरा हो जाएगा अभी इसमें 12 से 14 घंटे का वक्त लगता है।

खंडवा जिले में 4500 करोड़ का यह सड़क मार्ग लाइफ लाइन बन जाएगा।

233.65 किमी के फोरलेन पर ₹4,415 करोड़ खर्च होंगे।

खंडवा। देश प्रदेश और जिले में विकास की बात सिर्फ भाजपा के साथ ही हो सकती है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा 2047 में भारत को पूर्णत: विकसित करने का जो संकल्प है वह विकास के माध्यम से पूरा होगा। विकास निरंतर चलने वाली प्रक्रिया हें, खंडवा संसदीय क्षेत्र में हमारे सभी जनप्रतिनिधियों के सहयोग से एवं उनके प्रयासों से लगातार हमारा जिला विकास की ओर अग्रसर है, समाजसेवी व प्रवक्ता सुनील जैन में बताया कि दादाजी धाम पर मंदिर निर्माण के साथ ही अब तेज गति से जिले के विकास को भी पंख लग गए हैं, लगातार बड़ी सौगात हमें दादाजी के आशीर्वाद से प्राप्त हो रही है। हमारे जिले के सभी जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्र में विकास को लेकर काफी सक्रिय है और मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रिमंडल के सदस्यों तक विकास को लेकर अपनी बात रखते हुए विकास की स्वीकृति प्राप्त कर रहे हें, प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि खंडवा डुल्हार, खंडवा मुंदी सड़क मार्ग, बटालियन, सुरगांव निपानी एवं देशगांव में औद्योगिक क्षेत्र के साथ ही जिले को एक बहुत बड़ी उपलब्धि 233.65 किलोमीटर के फोर लाइन पर 4415 करोड़ का बैतूल खंडवा फोरलेन सड़क मार्ग बनने जा रहा है, इस मार्ग से गुजरात- महाराष्ट्र से सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी। इस सड़क को सिक्स लेन के हिसाब से सर्वे किया गया है। भविष्य में 6 लेन की तैयारी है। तीन प्रदेश इससे जुड़ेंगे समाजसेवी व प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया यह मार्ग
बैतूल-खंडवा-वडोदरा कॉरिडोर का हिस्सा है। इसके जरिए मध्यप्रदेश की कनेक्टिविटी महाराष्ट्र और गुजरात से मजबूत होगी। फिलहाल मार्ग को चार लेन में विकसित किया जाएगा और भविष्य में इसे छह लेन तक बढ़ाने की योजना है।

इंदौर से नागपुर तक तेज रूट
फोरलेन बनने के बाद इंदौर से हरदा और बैतूल होते हुए नागपुर जाने वाले ट्रैफिक को बड़ा फायदा मिलेगा। यह कॉरिडोर NH-47, NH-753 और NH-52 जैसे प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों को बेहतर तरीके से जोड़ेगा।

दो बड़े एयरपोर्ट जुड़ेंगे
परियोजना दस्तावेजों के अनुसार यह मार्ग इंदौर और नागपुर एयरपोर्ट, इंदौर के मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क तथा बैतूल-खंडवा के प्रमुख रेलवे स्टेशनों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत करने वाली अहम कड़ी बनेगा।

महाराष्ट्र के कई शहर सीधे जुड़ेंगे

फोरलेन बनने के बाद खंडवा की सड़क कनेक्टिविटी महाराष्ट्र के नागपुर, जलगांव, भुसावल, अकोला, वाशिम, हिंगोली और नांदेड़ जैसे शहरों से बेहतर होगी। वहीं गुजरात के अहमदाबाद और वडोदरा तक पहुंच भी आसान होगी। इससे माल परिवहन के साथ यात्रियों के आवागमन का समय घटने और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।

निमाड़ से बैतूल-छिंदवाड़ा तक नया कनेक्टिविटी कॉरिडोर

सुनील जैन ने बताया कि इस परियोजना का असर केवल इंदौर-नागपुर रूट तक सीमित नहीं रहेगा। खंडवा, खरगोन और बड़वानी सहित निमाड़ के जिलों को बैतूल और आगे छिंदवाड़ा-नागपुर क्षेत्र से बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा। बैतूल और छिंदवाड़ा की ओर से आने वाला ट्रैफिक खंडवा के रास्ते इंदौर और अन्य मालवा क्षेत्रों तक तेजी से पहुंच सकेगा।
सिंहस्थ-2028 में भी महत्वपूर्ण भूमिका
सिंहस्थ-2028 के लिहाज से भी यह फोरलेन अहम माना जा रहा है। उज्जैन और ओंकारेश्वर के बीच यातायात दबाव को संभालने में बेहतर सड़क नेटवर्क मददगार हो सकता है। महाराष्ट्र और गुजरात की ओर से ओंकारेश्वर और उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी यह मार्ग उपयोगी साबित होगा।

2027 से काम शुरू होने की संभावना

फिलहाल NHAI की ओर से डीपीआर तैयार की जा रही है। डीपीआर को मंजूरी मिलने के बाद निर्माण शुरू होने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। मौजूदा अपडेट के अनुसार जनवरी 2027 से काम शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।परियोजना में सड़क के ब्लैक स्पॉट खत्म करने और सुरक्षित यातायात व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर रहेगा। निर्माण पूरा होने के बाद वाहनों की गति और यात्रा समय में बड़ा सुधार होने की उम्मीद है। लक्ष्य के मुताबिक हाईवे 2029 के अंत या 2030 की शुरुआत तक तैयार हो सकता है।

एक फोरलेन, तीन राज्यों की कनेक्टिविटी

इंदौर → हरदा → बैतूल → खंडवा → महाराष्ट्र और आगे गुजरात से जुड़ने वाला यह नेटवर्क मध्यप्रदेश के लिए सड़क, व्यापार और पर्यटन—तीनों लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। खासकर खंडवा और निमाड़ के लिए यह प्रोजेक्ट क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

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